नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली के लाल किले पर आजादी की 62वीं सालगिरह के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि देश को एक और हरित क्रांति की जरूरत है, जिससे देश में कृषि का उत्पादन बढ़ाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2004-05 से लेकर वर्ष 2007-08 तक हमारी अर्थव्यवस्था लगभग नौ फीसदी की दर से बढ़ी थी। दुनिया भर में आर्थिक हालात खराब होने की वजह से यह विकास दर 2008-09 में कम होकर 6.7 फीसदी हो गई। सिंह ने कहा कि हमारी नीतियों का ही नतीजा है कि दूसरे देशों की तुलना में हम पर विश्व आर्थिक संकट का कम असर पड़ा है। अपनी विकास दर को वापस नौ फीसदी पर लाना हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उसके लिए जो भी कदम जरूरी है, हम उठाएंगे।

देश में सूखे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल मानसूल में कुछ कमी हुई है। इसका कुछ विपरीत प्रभाव तो हमारी फसलों पर पड़ेगा पर मुझे यकीन है कि हम इस परिस्थिति का सामना बखूबी कर पाएंगे। किसान की मदद की बात करते हुए सिंह ने कहा सूखे का मुकाबला करने के लिए किसानों को हर प्रकार की मदद दी जाएगी। मानसून की कमी को देखते हुए सरकार ने बैंकों से लिए गए कर्ज की अदायगी की तारीख को मुल्तवी कर दिया गया है।

देश में खाद्यान्नों की कालाबारी पर प्रधानमंत्री ने सभी राज्य सरकारों को अपना कानूनी अधिकार का प्रयोग करने को कहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार चीजों की बढ़ती हुई कीमतों पर काबू पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। मैं सभी राज्यों सरकारों से अपील करुंगा कि वे आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करें।

प्रधानमंत्री के भाषण में स्वाइन फ्लू का जिक्र भी हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि एच१एन१ वायरस से फैल रहे फ्लू से कुछ के कुछ हिस्से परेशान हैं। केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ इस बीमारी पर काबू पाने की हर जरूरी कोशिश करती रहेगी। इस बीमारी से डर और घबराहट की जरूरत नहीं है।

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