लाल किले की प्राचीर से....

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज आजादी की 62 वीं वर्षगांठ के मौके पर दिल्ली में लाल किले पर झंड़ा फहराया ...खास तस्वीरें....

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नागरिक अवज्ञा आंदोलन
भास्कर नेटवर्क Friday, August 14, 2009 18:29 [IST]

नागरिक अवज्ञा आंदोलन : महात्‍मा गांधी ने नागरिक अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्‍व किया, जिसकी शुरूआत दिसंबर 1929 में कांग्रेस के सत्र के दौरान की गई थी। इस अभियान का लक्ष्‍य ब्रिटिश सरकार के आदेशों की संपूर्ण अवज्ञा करना था। इस आंदोलन के दौरान यह निर्णय लिया गया कि भारत 26 जनवरी को पूरे देश में स्‍वतंत्रता दिवस मनाएगा।

अत: 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में बैठकें आयोजित की गई और कांग्रेस ने तिरंगा लहराया। ब्रिटिश सरकार ने इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की तथा इसके लिए लोगों को निर्दयतापूर्वक गोलियों से भून दिया गया, हजारों लोगों को मार डाला गया। गांधीजी और जवाहर लाल नेहरू के साथ हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया।

भारत छोड़ो आंदोलन : अगस्‍त 1942 में गांधीजी ने ''भारत छोड़ो आंदोलन'' की शुरूआत की तथा भारत छोड़ कर जाने के लिए अंग्रेजों को मजबूर करने के लिए एक सामूहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन ''करो या मरो'' आरंभ करने का निर्णय लिया। इस आंदोलन के बाद रेलवे स्‍टेशनों, दूरभाष कार्यालयों, सरकारी भवनों और अन्‍य स्‍थानों तथा उपनिवेश राज के संस्‍थानों पर बड़े स्‍तर पर हिंसा शुरू हो गई।

यह आंदोलन जल्‍दी ही हिंसक हो गया और सरकार ने हिंसा की इन गतिविधियों के लिए गांधी जी को उत्तरदायी ठहराया और कहा कि यह कांग्रेस की नीति का एक जानबूझ कर किया गया कृत्‍य है। जबकि सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, कांग्रेस पर प्रतिबंद लगा दिया गया और आंदोलन को दबाने के लिए सेना को बुला लिया गया।

उधर अंग्रेजी सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उन्‍हीं के घर पर नजरबंद कर रखा था। लेकिन एक दिन अचानक वो अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकते हुए वहां से फरार हो गए। विदेश पहुंचकर उन्‍होंने ब्रिटिश राज को भारत से उखाड़ फेंकने के लिए इंडियन नेशनल आर्मी (आजाद हिंद फौज) का गठन किया।

दूसरा विश्‍व युद्ध सितंबर 1939 में शुरू हुआ और भारतीय नेताओं से परामर्श किए बिना ही भारत की ओर से ब्रिटिश राज के गर्वनर जनरल ने युद्ध की घोषणा कर दी। सुभाष चंद्र बोस ने जापान की सहायता से ब्रिटिश सेनाओं के साथ संघर्ष किया और अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों को ब्रिटिश राज के कब्‍जे से मुक्‍त करा लिया तथा वे भारत की पूर्वोत्तर सीमा पर भी प्रवेश कर गए। लेकिन 1945 में एक हवाई दुर्घटना में नेताजी की मृत्‍यु हो गई।

''तुम मुझे खून दो और मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा'' उनके द्वारा दिया गया सर्वाधिक लोकप्रिय नारा था, जिसमें उन्‍होंने भारत के लोगों को आजादी के इस संघर्ष में भाग लेने का आमंत्रण दिया।

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